Thursday, November 28, 2013

"अब तो जाग जरा" ------क्रांति

"अब तो जाग जरा" ------क्रांति

"फिर मत कहना देश को बचा न सका ,
अब तो जाग जरा "

कभी पाकिस्तान ,तो कभी चाइना हमारे ही घरों में आ रहा ,
लो-कल-लो-बात अब तो बांग्लादेश भी हमें आँखे दिखा रहा ,
महामौन मंत्री , और मैडम जी अमेरिका में शीश झुका रहा ,
अब तो जाग जरा | |

आकाओं ने बेच दिया इमान ,गिरवी रखने को है सोना , गिरवी रख देंगे हमारा सम्मान ,
देश के दुश्मन देश को बेच रहा ,
अब तो जाग जरा | |

लूट गयी ज़मीन , लूट गया आसमां (टू जी )
कोयला , लोहा ,वन सबकुछ दुश्मन लूट रहा ,
अब तो जाग जरा | |

गिर गया नेताओं और बाबाओं का चरित्र ,बढ गया इंफ्लेशन ,
रुपया , जी .डी .पी ,सेंसेक्स सबकुछ दुश्मन गिरा रहा ,
अब तो जाग जरा | |

अँधेरा घना छा रहा , देश पे घोटालों के बादल मंडरा रहा ,
निराशाओं को दूर करने झाड़ू आ रहा ,आम आदमी जाग रहा ,
हाथों में हाथ , कंधे से कन्धा स्वराज मिला रहा ,
अब तो जाग जरा | |

Copy & Paste from internet

No comments:

Post a Comment